अटल बिहारी बाजपेई जी को अन्तिम नमन

पूरी मोदी के कैबिनेट के मंत्री और जन सैलाब ने शव यात्रा पैदल की

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आखिर दुआओं ने भी दम तोड़ दिया ,आज देश ने युग पुरूष, जननायक, अजातशत्रु, भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह, दूरद्रष्टा, आदर्श व्यक्तित्व और मेरे सबसे प्रिय राजनेता को खो दिया आजादी के बाद न ऐसा कोई नेता हुआ और शायद ही हो पाए आप के जाने से भारतीय राजनीति में जो खाली शून्य पैदा हुआ वो कभी नही भर सकेगा ह्रदय की गहराइयों से आपको अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रधांजलि देता हूँअटल स्तम्भ !! 👇👇👇👇👇 यूपी की बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे एक 37 वर्षीय नौजवान सांसद ने 1962 के चीन युद्ध में भारत की शर्मनाक पराजय के बाद संसद में बोलते हुए तत्कालीन कांग्रेसी सरकार और उसके मुखिया प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों की धज्जियां उड़ा दी थी. उस नौजवान के सम्बोधन से प्रभावित हुए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू स्वयं को रोक नहीं सके थे और उस नौजवान की सीट पर जाकर उसको बधाई देते हुए बोले थे कि तुम एक दिन इस देश के प्रधानमंत्री बनोगे. 34 साल बाद नेहरू की वो भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई थी. उस नौजवान का नाम था अटल बिहारी वाजपेयी जो 1996 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे. 1984 से लेकर 2004 में लखनऊ में सम्पन्न हुई उनकी अंतिम जनसभा तक अटल जी की लगभग 70-80 चुनावी रैलियों, जनसभाओं, नुक्क्ड़ सभाओं, तथा लगभग दर्जन भर पत्रकार वार्ताओं में उनको बोलते हुए प्रत्यक्ष देखा-सुना है. टीवी और रेडियो पर भी उनके भाषण साक्षात्कार खूब देखे सुने, लेकिन अटल जी का एक भी ऐसा साक्षात्कार या भाषण मुझे याद नहीं जिसमे उन्होंने खुद अपनी प्रशंसा में एक लाइन भी कभी बोली हो. इसके बजाय अपनी किसी परिस्थितिजन्य राजनीतिक लाचारी पर नटखट मुस्कुराहट के साथ खुद पर ही व्यंग्य करते हुए मैंने उन्हें कई बार देखा सुना है. अटल जी इतने विराट राजनीतिक व्यक्तित्व के स्वामी थे कि विपक्ष भी उनके खिलाफ कभी कोई व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचता था. स्व.नरसिम्हा राव और स्व. चंद्रशेखर सरीखे भारतीय राजनीति के दिग्गज उन्हें सार्वजनिक रूप से अपना राजनीतिक गुरु कहते और स्वीकारते थे. 1999 में जब एक वोट से अटल सरकार गिर गयी थी तब स्व.चंद्रशेखर ने कहा था कि यदि मुझे यह मालूम होता कि सरकार एक वोट से गिरने जा रही है तो मैं अपना वोट अटल जी की सरकार के पक्ष में देता. विपक्ष में रहते हुए जगुआर विमान सौदे में मुद्रा असंतुलन की जटिल उलझन सुलझाने का मामला रहा हो या संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि बनकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने का मामला रहा हो. अटल जी की ख्याति के सागर में उमड़ने वाली उनकी प्रशंसा की गगनचुम्बी लहरें दलीय सीमाओं के बाँध तोड़ देती थीं। भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न सैन्य शक्ति बनाने वाले अटल जी को देश कैसे भूल जाएगा.? 1998 में जब अटल जी ने देश की कमान संभाली थी उस समय देशवासी 16 रुपये प्रति मिनट आउटगोइंग और 8 रुपये प्रति मिनट इनकमिंग प्रति कॉल की दर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते थे। मोबाइल हैंडसेटों का न्यूनतम मूल्य 25 हज़ार होता था। मई 2004 में जब अटल जी ने सत्ता छोड़ी थी तो देशवासी 2 हज़ार रुपये के मोबाइल हैंडसेट के साथ 1 रुपये प्रति मिनट आउटगोइंग की दर से मोबाइल सेवाओं का उपयोग कर रहे थे। इनकमिंग कॉल की वसूली इतिहास के पन्नों में दफन हो चुकी थी। भारतीय इतिहास में अटल जी अकेले ऐसे शासक हैं जिन्होंने सब सुविधाओं से सुसज्जित विशालकाय सड़कों वाले भारत की अपनी कल्पना को अपने कार्यकाल में ही स्वर्णिम चतुर्भुज नाम की अपनी योजना को धरातल पर क्रियान्वित कर दिखाया था। मेरी या मुझसे पहले की पीढ़ी भलीभांति यह जानती है कि भारतीय राजनीति के उस "अटल काल" से पहले भारतीय सड़कों की स्थिति कितनी दयनीय और दरिद्र थी। ऐसी अनेक उपलब्धियां हैं अटल जी के खाते में। यह उपलब्धियां इसलिए अत्यंत विलक्षण हो जाती हैं क्योंकि परमाणु परीक्षण के पश्चात लगे और लम्बे समय तक चले वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने यह उपलब्धियां अपनी उस सरकार के माध्यम से प्राप्त की थीं जो गठबन्धन के 26 सहयोगियों की बैसाखियों पर टिकी हुई थी। लेकिन 2004 में सत्ता से जाते समय 8% की विकास दर की विरासत अटल जी छोड़कर गए थे। यह संक्षिप्त विवरण बता देता है कि अटल जी क्या थे कैसे थे.? यह संक्षिप्त विवरण यह भी शंखनाद कर रहा है कि अटल जी जैसा ना कोई था, ना कोई है, ना कोई होगा... माँ भारती के सच्चे सपूत को शत शत नमन ॐ शांतिः शांतिः शांतिः विनम्र श्रधांजलि.... क्रूर काल के हाथो से देखो हम फिर से छले गए । राजनीति के शिखर हिमालय अटल बिहारी चले गए । अपनी शर्तों पर जिए सदा कोई टुकड़ा डाल नही पाया । अटल, अटल ही रहे सदा कोई उनको टाल नही पाया । देश धर्म की बात आए तो मुद्दे पर तन जाते थे । देशद्रोहियों के सम्मुख वो स्वयं आग बन जाते थे । आँख मूँदकर तीन रंग का कफ़न लपेटा चला गया । मन आहत है भारत माँ का प्यारा बेटा चला गया । चालीस साल रहे विपक्षी, मंत्री पद भी पाते थे । चाहे कोई सरकार रहे सब अटल को गले लगाते थे । राजनीति की परिभाषा और उत्कर्षों का नाम अटल है । पैरों के छालें ना देखे,, संघर्षों का नाम अटल है । जिससे भारत रोशन था वो रवि भी चला गया । राजनेता के साथ साथ में एक कवि भी चला गया । वह अग्निपुंज भारत माँ का मृत्यु से हार नही सकता । अटल अमर है दुनिया में कोई उनको मार नही सकता । जो जो सपने देखे तुमने सबको सफल बनाएँगे । और तिरंगा दुनिया के हर कोने में लहराएँगे । *अटल जी की कलम से