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गैस सिलेंडर के नियमों में बड़ा बदलाव, ध्यान नहीं दिया तो कट जाएगा कनेक्शन, जानें 25, 30 और 45 दिन का गणित
नियमों के अनुसार रिफिलिंग की समय सीमा अब शहर के लिए 25 दिन और गांव के लिए 45 दिन कर दी है. साथ ही, पीएनजी कनेक्शन लेने वाले ग्राहकों के लिए 30 दिनों के अंदर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना जरूरी है. ऐसा ना करने पर कानूनी या पेनल्टी लग सकती है.नअगर इन नियमों को ना माना गया तो गैस कनेक्शन ब्लॉक या टर्मिनेट हो सकता है. तो चलिए समझते हैं, ये नए नियम क्या हैं और इनका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.
नए नियमों के अनुसार, अगर आप अर्बन एरिया में रहते हैं, तो आप एक सिलेंडर लेने के बाद अगले 25 दिनों से पहले दूसरा सिलेंडर रिफिल नहीं करा सकते. यानी दो घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर होना जरूरी है. ये नियम 5 किलो, 10 किलो और ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडरों पर लागू होगा.
अगर आपने घर में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी लगवा लिया है, तो ये नियम आपके लिए जाननाा जरूरी हो जाता है. लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस संशोधन के अनुसार, पीएनजी कनेक्शन शुरू होने के 30 दिनों के अंदर अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना ही होगा. अगर ऐसा नहीं किया जाता तो मौजूदा पीएनजी कनेक्शन को ब्लॉक कर दिया जाएगा.
सरकार ने ग्राहकों को नियम मानने पर एक बड़ी राहत दी है. जब आप 30 दिनों के अंदर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करेंगे, तो आपको एक ट्रांसफर वाउचर मिलेगा. फ्यूचर में अगर आप किसी ऐसे इलाके में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी नहीं है, तो इस वाउचर के जरिए आपका पुराना एलपीजी कनेक्शन तुरंत रीस्टोर कर दिया जाएगा.
अब सवाल कि अगर आप सिलेंडर सरेंडर करना चाहते हैं तो उसके लिए क्या प्रोसेस है. ज्यादा इसके लिए कुछ करना नहीं है. सप्लायर की ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाना होगा. वहां सरेंडर का ऑप्शन सिलेक्ट करना होगा. इसके साथ mypngd.in पोर्टल पर जाकर भी सिलेंडर सरेंडर कर सकते हैं. हालांकि इस पूरे प्रोसेस के दौरान आपको कुछ डॉक्यूमेंट्स अपने साथ रखने होंगे. जिसमें,
एक बारी जब कनेक्शन सरेंडर हो जाएगा, उसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर का कर्मचारी आपके घर से सिलेंडर और प्रेशर रेगुलेटर कलेक्ट कर लेगा और आपका सिक्योरिटी डिपॉजिट आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा.
खराब या एक्सपायर्ड सामान On Line मिला? इन तरीकों से करें शिकायत, फॉलो करें ये आसान स्टेप्स
क्विक कॉमर्स ऐप स्विग्गी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) से सड़े-गले अंडे और एक्सपायर्ड दूध मिलने की शिकायतों पर फूड रेगुलेटर FSSAI ने कड़ा रुख अपनाया है. अगर आप भी ऑनलाइन ग्रॉसरी मंगाते हैं और आपके साथ ऐसा धोखा हो जाए, तो घर बैठे इन आसान तरीकों से अपनी शिकायत दर्ज कराएं और अपना हक पाएं.
How to complain FSSAI: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 10 मिनट में ग्रॉसरी और खाना डिलीवरी करने वाले ऐप्स हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन क्या यह स्पीड आपकी सेहत की कीमत पर मिल रही है? दरअसल, हाल ही में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विग्गी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) पर एक दो नहीं, बल्कि पूरे 9 नोटिस ठोक दिए हैं.
मामला बेहद गंभीर है. दरअसल, ग्राहकों की लगातार आ रही शिकायतों के बाद फूड रेगुलेटर ने यह कदम उठाया है. FSSAI ने कंपनी से पूरे मामले पर दस्तावेजों के साथ जवाब और नियमों के पालन की रिपोर्ट मांगी है. अगर समय पर जवाब नहीं मिला, तो कंपनी को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. FSSAI को मिली शिकायतों के मुताबिक, स्विग्गी इंस्टामार्ट पर एक्सपायर्ड सामान बेचने, गलत तरीके से स्टोरेज करने और कस्टमर की शिकायतों को नजरअंदाज करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.
ऐसे में अगर किसी भी क्विककॉमर्स या फूड डिलीवरी ऐप से आपको भी खराब, सड़ा-गला या एक्सपायर्ड सामान मिलता है, तो नुकसान सहकर चुप बैठने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. अपनी सुरक्षा के लिए इन स्टेप्स को फॉलो कर आप अपना हक पाने के साथ ही दोषी कंपी को सबक सिखा सकते हैं.
सामान को पैकेट से निकालते ही अगर खराब लगे, तो उसे डस्टबिन में फेंकने की गलती न करें. सबसे पहले अपने फोन से उसकी साफ तस्वीरें और वीडियो लें. खासकर प्रोडक्ट के पीछे छपी Expiry Date, खराब या सड़े हुए हिस्से और फटी हुई पैकेजिंग को कैमरे में जरूर कैद करें. इसके साथ ही अपने ऑर्डर इनवॉइस यानी बिल का स्क्रीनशॉट भी संभाल कर रखें.
2. ऐप के सपोर्ट सेक्शन में शिकायत दर्ज करें
सबसे पहला कदम ऐप पर ही उठाएं. ऐप के 'Help' या 'Support' सेक्शन में जाएं और 'Report Issue' पर क्लिक करके उस खराब प्रोडक्ट को सिलेक्ट करें. वहां फोटो अपलोड करें और स्पष्ट शब्दों में लिखें कि यह सामान उपयोग के लिए असुरक्षित है. अगर ऐप का चैट बॉट आपको सिर्फ पैसे वापस देकर मामला रफा दफा करना चाहे, तो भी संतुष्ट न हों. मामले को 'Escalate' करें और कस्टमर केयर से ईमेल पर लिखित स्पष्टीकरण की मांग करें.
सिर्फ इन ऐप चैट के भरोसे न रहें. कंपनी की ऑफिशियल कस्टमर सपोर्ट ईमेल आईडी पर एक औपचारिक मेल लिखें. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में स्पष्ट रूप से लिखें "Formal Complaint: Delivery of Expired/Unsafe Food इसके साथ ही Order ID भी लिखें. मेल में पूरी घटना का विवरण दें और फोटो अटैच करें. दरअसल, यह ईमेल भविष्य में आपके लिए सबसे मजबूत कानूनी सबूत बनता है.
अगर कंपनी आपकी शिकायत को हल्के में लेती है या कोई संतोषजनक समाधान नहीं देती, तो सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग में शिकायत करें. यह बेहद असरदार तरीका है. इसके अलावा, आप सीधे 1800114000 या 1915 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. साथ ही ऑनलाइन पोर्टल पर भी आप `consumerhelpline.gov.in` पर जाकर भी अपने डॉक्यूमेंट्स और फोटो के साथ ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं.
आजकल कंपनियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी साख को लेकर बेहद संवेदनशील नजर आती हैं. अगर कहीं सुनवाई न हो रही हो, तो X पर अपनी शिकायत, ऑर्डर आईडी और खराब सामान की तस्वीरों को पोस्ट करें. पोस्ट में कंपनी के आधिकारिक हैंडल के साथ-साथ @fssaiindia को भी जरूर टैग करें. अमूमन सोशल मीडिया टीमें ऐसे मामलों पर तुरंत एक्टिव होकर रिस्पॉन्स देती हैं.
खाने पीने की चीजों की क्वालिटी से समझौता करना जानलेवा हो सकता है. अगर अनजाने में आपने या परिवार के किसी सदस्य ने ऐसा दूषित खाना खा लिया है और तबीयत खराब होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. डॉक्टर के पर्चे और मेडिकल बिलों को सुरक्षित रखें, इन्हें बाद में आप कंज्यूमर कोर्ट में मुआवजे (Compensation) का दावा ठोकने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
किराएदार ही फ्लैट का बॉस है, मकान मालिक भी नहीं कर पाएंगे मनमानी, जानें अपने ये 5 बड़े हक
बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, नोएडा, में किराए के लिए घर ढूंढना किसी जंग जीतने से कम नहीं है, घर तो चलिए एक बार को अच्छा जल्दी मिल भी जाए पर असली जंग मकान मालिक के नियम और शर्तों से शुरू होती है. जैसे रात 10 बजे के बाद एंट्री नहीं, बिना पूछे दोस्त नहीं आ सकते और अगले महीने से किराया 20% बढ़ेगा. ऐसे में अगर आप भी किराए के मकान में रहते हैं, तो ये डॉयलाग्स आपके लिए नए को कतई नहीं होंगे.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि लॉ के अनुसार आप सिर्फ एक किराएदार नहीं, बल्कि उस घर के टेंपरेरी मालिक हैं? जी, एडवोकेट के अनुसार रेंट रूल्स किराएदारों को ऐसे दमदार राइट्स देते हैं, जिसके बाद मकान मालिक अपनी मनमानी बिल्कुल नहीं चला सकते. तो चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं किराएदारों के वो 5 बड़े अधिकार, जो हर रेंटर को पता होने चाहिए.
एडवोकेट राकेश उपाध्याय ने जोर देते हुए कहा कि बिना रेंट एग्रीमेंट के किसी भी घर में शिफ्ट ना हों. इसके अलावा रेंट एग्रीमेंट में किराया, सिक्योरिटी मनी, और रहने का पीरियड साफ-साफ लिखा होना चाहिए. 11 महीने का एग्रीमेंट दोनों साइड को लीगल प्रोटेक्शन देता है. अगर मकान मालिक बीच में मुकरता है, तो ये एग्रीमेंट आपका सबसे बड़ा हथिार बनता है.
अमूमन देखा जाता है कि मकान मालिक साल के बीच में ही किराया बढ़ाने की मांग करने लगते हैं. एडवोकेट राकेश के अनुसार, नियम कहते हैं कि एग्रीमेंट के पीरियड के दौरान मकान मालिक बीच में किराया नहीं बढ़ा सकता. किराया बढ़ाने के लिए कम से कम 3 महीने पहले लिखित में नोटिस देना जरूरी है.
अगर आपके मकान मालिक कभी भी आपके फ्लैट का ताला खुलवाकर अंदर आ जाते हैं, तो ये पूरी तरह से लॉ के खिलाफ है. कानून के अनुसार आपकी प्राइवेसी आपका अधिकार है. मकान मालिक को घर को देखने या मरम्मत के लिए आने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको इसके बारे में बताना जरूरी होता है.
मकान खाली करते समय अक्सर सिक्योरिटी मनी को लेकर लड़ाई-झगड़े होते हैं. एडवोकेट राकेश उपाध्याय ने कहा कि रिहायशी घरों के लिए मकान मालिक ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का किराया ही एडवांस या सिक्योरिटी के तौर पर ले सकते हैं. और हां एक जरूरी बात कि घर खाली करने के बाद, बिना किसी नुकसान के, ये अमाउंट तुरंत लौटाना होगा.
इन दिनों किराएदार को एक समस्या से अमूमन दो चार होना पड़ता है कि छोटे सी किसी बात पर विवाद होने या किराया देरी से मिलने पर मकान मालिक बिजली या पानी का कनेक्शन तुरंत बंद कर देते हैं. ऐसी स्थिति पर एक्सपर्ट ने कहा कि मकान मालिक कानूनन ऐसा नहीं कर सकते. अगर वो बिजली या पानी की सप्लाई बंद करते हैं, तो किराएदार पास पूरा हक है वो रेंट अथॉरिटी या कोर्ट के पास जाए. शिकायत करने पर मकान मालिक पर बड़ा जुर्माना लग सकता है.
सील बंद बोतल से बिगड़ी तबीयत! बोतल खोलकर गटा-गट पीने से पहले ये 5 चीजें जरूर चेक करें

हापुड़ में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. ज्वैलरी खरीदने गई एक युवती ने प्यास लगने पर पानी मांगा, लेकिन पानी की जगह उसे ऐसी बोतल मिली जिसमें कथित तौर पर तेजाब भरा था. पानी समझकर घूंट भरते ही युवती की चीख निकल गई. पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई.
शुक्रवार की शाम नगर कोतवाली क्षेत्र के अर्जुन नगर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रिया नाम की एक युवती ज्वेलरी खरीदने के लिए एक दुकान पर पहुंची थी. खरीदारी के दौरान उसे प्यास लगी, तो ज्वेलर्स ने अपने कर्मचारी को पास की एक कन्फेक्शनरी से एक नामी ब्रांड की पानी की बोतल लाने के लिए भेजा. दुकानदार ने डीप फ्रीजर से बोतल निकालकर कर्मचारी को दे दी और कर्मचारी ने वह बोतल युवती को दे दी.
बोतल में भरा था तेजाब, पीते ही बिगड़ी हालत बोतल में पानी की जगह कथित तौर पर तेजाब भरा था. युवती तुरंत दुकान से बाहर भागी और मुंह में गया तरल पदार्थ थूक दिया. उसकी हालत बिगड़ने पर पहले स्थानीय अस्पताल और फिर गंभीर स्थिति में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया, जहां मेडिकल कॉलेज में उसका इलाज चल रहा है. घटना के बाद पुलिस ने कन्फैक्शनरी संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. दुकानदार का दावा है कि बोतल सीलबंद थी और फ्रिज से निकालकर दी गई थी. वहीं, पुलिस को दुकान से तेजाब से भरी कुछ बोतलें भी बरामद हुई हैं. पूरे मामले की जांच जारी है.तेज प्यास लगने के कारण रिया ने बिना कुछ सोचे-समझे बोतल खोली और पानी समझकर एक घूंट पी लिया. लेकिन अगले ही पल उसकी चीख निकल गई. बताया जा रहा है कि बोतल में पानी की जगह तेजाब जैसा कोई खतरनाक तरल पदार्थ भरा हुआ था. युवती तुरंत दुकान से बाहर भागी और मुंह में गया तरल पदार्थ थूक दिया, इसके बावजूद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी.
उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और फिर हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया. फिलहाल मेडिकल कॉलेज में उसका इलाज चल रहा है.
यह पूरी घटना ज्वैलर्स की दुकान में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पानी की बोतल में तेजाब कैसे पहुंचा और इसके लिए जिम्मेदार कौन है. फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है. मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी. दुकानदार देनू ने बताया "हमारी जानकारी में बोतल पूरी तरह सीलबंद थी. हमने जैसी फ्रिज में रखी थी, वैसी ही ग्राहक को दे दी.
कई बार कुछ लोग पुरानी प्लास्टिक की बोतलों को दोबारा बेचने के लिए उन्हें केमिकल या तेजाब से धोते हैं. अगर बोतल ठीक से साफ न हो, तो उसमें उस केमिकल के कुछ अंश रह सकते हैं. ऐसे में अगर उसी बोतल में पानी भरकर बेचा जाए, तो उसे पीना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.
सबसे पहले बोतल को सूंघें
जब भी आप बाहर से पानी की बोतल खरीदें, तो खोलते ही उसे सूंघ लें. अगर पानी या बोतल से किसी तरह की अजीब, तेज या रासायनिक बदबू आए, तो उसे बिल्कुल न पिएं.
बोतल की सील से पता लगाएं
यह सुनिश्चित करें कि बोतल की सील पूरी तरह सुरक्षित और अनओपन हो. अगर सील टूटी हुई लगे, तो बोतल न खरीदें.
पानी का रंग देखें
अगर पानी का रंग सामान्य से अलग दिखाई दे या उसमें कोई कण नजर आएं, तो उसका इस्तेमाल न करें.
स्वाद से पता लगाएं
अगर पानी पीते ही उसका स्वाद अजीब, कड़वा या जलन पैदा करने वाला महसूस हो, तो उसे तुरंत थूक दें और मुंह अच्छी तरह साफ करें.
खाली बोतल को मरोड़कर फेंकें
पानी पीने के बाद खाली बोतल को मरोड़कर या दबाकर फेंक दें, ताकि उसका दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया वृक्षारोपण, 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को दिया जन-जन तक पहुंचाने का संदेश
कानपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से चलाए जा रहे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी जूही मंडल के शक्ति केंद्र कैंब्रिज कॉन्वेंट में सेक्टर अध्यक्ष कौशल कुमार के नेतृत्व में बूथ अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं ने आम के पवित्र वृक्ष का रोपण किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जूही मंडल के प्रवासी एवं मंडल मंत्री डॉ. समरदीप पांडेय उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि मां के प्रति सम्मान, प्रेम, त्याग और स्नेह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक भावनात्मक प्रयास है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
डॉ. पांडेय ने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा भविष्य में स्वच्छ वायु, हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर जीवन का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि "एक पेड़ मां के नाम" अभियान मां के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति हमारे संकल्प का प्रतीक है।
इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।
मोबाइल पर भी 1600 और 140 सीरीज वाले नंबर से आ रही कॉल, जान लें खतरा है जरूरी है
TRAI के मुताबिक, 1600 सीरीज वाले नंबर का इस्तेमाल RBI, SEBI, IRDAI, PFRDA के अधीन आने वाली संस्थाएं अपने ग्राहकों से संपर्क करने के लिए करती है. इसके अलावा सरकारी संस्थाएं भी जनता को अहम सूचना देने के लिए 1600 सीरीज के नंबरों का इस्तेमाल करती है.
TRAI ने बताया कि 1600 सीरीज वाले नंबर के इस्तेमाल का उद्देश्य है कि ग्राहकों और जनता को मिलने वाली अहम कॉल विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए है. टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन के तहत 1600 सीरीज से आने वाली कॉल को टैग करना, ब्लॉक करना या फिल्टर करना अनुमति नहीं है.
TRAI ने बताया कि 140 सीरीज के नंबरों का इस्तेमाल सभी क्षेत्रों की कंपनियों और संस्थाओं द्वारा प्रमोशनल कॉल करने के लिए अनिवार्य किया गया है. जो भी संस्थान प्रमोशनल कॉल करना चाहती है उसे TCCCPR के तहत संबंधित टेलीकॉम कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा और नियामकीय नियमों का भी पालन करना होगा.
हालांकि दूरसंचार नियामक बताया कि ग्राहकों के पास इन कॉल्स को DND रजिस्ट्री के जरिए रोकने का अधिकार है. यानी ग्राहक प्रमोशनल कॉल को ब्लॉक कर सकते हैं. जबकि 140 सीरीज से आने वाली कॉल को भी टैग या फिल्टर करने की अनुमति नहीं है. केवल डीएनडी रजिस्ट्री के अनुसार इन्हें ब्लॉक किया जा सकता है.