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गोविंद नगर में नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, 180 छात्र-छात्राओं का हुआ चेकअप
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा जूही मंडल अध्यक्ष दीपू पासवान ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने स्वयं भी स्वास्थ्य परीक्षण कराकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
शिविर में डॉ. समरदीप पांडेय के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं दीं। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रद्धा सचान, केयर पैथोलॉजी के डॉ. आलोक एवं फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. सोनी उत्तम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस जनसेवा कार्य की सराहना करते हुए आईटीआई के प्रबंधक राजकुमार ने डॉ. समरदीप पांडेय एवं उनकी टीम को अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। शिविर में क्षेत्रीय लोगों और संस्थान के स्टाफ ने भी अपने स्वास्थ्य की जांच कराई।
डॉ. समरदीप पांडेय ने कहा कि वे और उनकी टीम समय-समय पर इस प्रकार के शिविरों के माध्यम से गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
कार्यक्रम में आईटीआई प्रिंसिपल स्नेहा सचान, भाजपा के वरिष्ठ नेता अवध बिहारी अवस्थी, मंडल उपाध्यक्ष सिमरन कौर, भाजपा नेता विनय मालवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक कॉलेज छात्रा ने दस्तावेजों में नाम की गड़बड़ी से परेशान होकर जहर खा लिया. दानपुर थाना क्षेत्र के सालरा पाड़ा गांव की रहने वाली छात्रा पूजा (दस्तावेजों में अलग-अलग नाम दर्ज) का कॉलेज में एडमिशन नहीं हो पा रहा था. इसकी वजह उसके 2 दस्तावेजों में अलग-अलग नाम होना था. छात्रा का मार्कशीट में सही नाम दर्ज था, लेकिन आधार कार्ड में नाम गलत होने से उसे परेशानी का सामना करना पड़ा. इसे ठीक कराने के लिए वह लगातार कोशिश कर रही थी, लेकिन फिर भी आधार में सुधार नहीं हो पाया.
परिजनों के मुताबिक, उसके आधार कार्ड में नाम उषा दर्ज है, जबकि अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में उसका नाम पूजा लिखा हुआ है. अलग-अलग दस्तावेजों में 2 अलग नाम होने के पर कॉलेज प्रशासन ने आपत्ति जाहिर की. इसकी वजह से कॉलेज प्रशासन ने एडमिशन देने से इनकार कर दिया.
परिजनों के मुताबिक, छात्रा पिछले कई दिनों से इस समस्या को ठीक कराने के लिए लगातार ई-मित्र केंद्रों के चक्कर लगा रही थी, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी. इसके चलते उसकी पढ़ाई के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ. इसी तनाव में आकर छात्रा ने जहरीली दवा का सेवन कर लिया.
घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई. तुरंत एंबुलेंस की मदद से उसे छोटी सरवन अस्पताल ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर एमजी अस्पताल बांसवाड़ा रेफर किया गया, फिलहाल छात्रा का इलाज जारी है.
मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। पिता की सख्ती से परेशान 23 साल के वकील ने की आत्महत्या, सुसाइड लेटर सोशल मीडिया में वायरल
कानपुर में 23 साल के एक वकील ने कोर्ट रूम की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी. वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने यह आत्मघाती फैसला अपने पिता के टॉर्चर से तंग आकर उठाई, इसकी जानकारी उनके सुसाइड नोट और स्टेटस से सामने आया है. प्रियांशु ने सुसाइड नोट में यहां तक लिखा कि मेरी लाश को पापा छू भी नहीं पाएं. उसके इस लाइन से ही समझ सकते हैं कि वो कितना परेशान रहा होगा. अब पुलिस मामले में आगे की छानबीन में जुटी है.
दरअसल कानपुर के कचहरी परिसर में गुरुवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई जब 5 मंजिला कोर्ट बिल्डिंग से अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोपहर करीब 2 बजे प्रियांशु श्रीवास्तव नई बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर पहुंचे और अचानक नीचे कूद गए.
सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई. सूचना मिलते ही डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की छानबीन शुरू की. छानबीन में पता चला कि प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपने वाट्सएप स्टेटस में दो पन्नों का एक सुसाइड नोट लगाया था.
सुसाइड नोट में वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने लिखा- अब तक जो चीजें मेरे साथ घटित हुईं, मुझे नहीं लगता कि इस तरह से बेगैरत की जिंदगी जीने लायक है. करीब 6 वर्ष की उम्र में फ्रिज में रखा आम का जूस पी लिया तो निर्वस्त्र कर घर से बाहर भगा दिया गया. हर मिनट शक की नजरों से देखना, एक एक मिनट का हिसाब लेना… ये मानसिक टॉर्चर ही है.
उसने आगे लिखा- हाईस्कूल रिजल्ट आने से पहले मेरे पापा ने मुझे धमकी दी कि अगर नंबर कम आए तो निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे. रोज घुट–घुट कर मरने से लाख गुना बेहतर है कि एक दिन मरके खत्म हो. सभी मां–बाप से मेरी यह अपील है कि अपने बच्चों पर उतना ही टॉर्चर करें, जितना वो बर्दाश्त कर सकें. मेरा ये निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं. मैं हार गया, पापा जीत गए. लव यू मम्मी….''
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल का मुआयना करने के बाद CCTV फुटेज में देखा गया है कि प्रियांशु पांचवी मंजिल पर बैठा है और फोन में बात करने के बाद छत से कूद गया इसमें एक सुसाइड नोट भी व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया गया था.
प्रियांशु के पिता भी वकील है. बताया गया कि प्रियांशु के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव कानपुर के बर्रा 8 निवासी हैं. प्रियांशु भी कचहरी में पिता के साथ वकालत करता था, सुसाइड नोट के अनुसार उसने अपने आत्महत्या के लिए अपने पिता को दोषी ठहराया है और पिता पर कई आरोप भी लगाए हैं.
🌞सुप्रभातम🌞
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दिनांक:- 24/04/2026, शुक्रवार
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परफेक्ट चाय कैसे बनती है? चाय बनाने में सही टाइमिंग से आता है चाय में स्वाद ....
क्या आप भी चाय पीने के शौकीन हैं, लेकिन घर में जब भी चाय बनाते हैं वो स्वाद नहीं आता है, जो बाहर टपरी वाली चाय में आता है. अगर आपका जवाब हां है, तो इस आर्टिकल में जानें परफेक्ट चाय का सीक्रेट.अक्सर लोग पानी रखते ही उसमें चाय पत्ती डाल देते हैं. यह सबसे बड़ी गलती है.
कब मिलाएं- पानी को पहले अच्छी तरह उबलने दें. जब पानी खौलने लगे, तब उसमें पत्ती डालें.
टाइमिंग- पत्ती डालने के बाद उसे सिर्फ 2 से 3 मिनट तक ही उबालें. अगर आप ज्यादा देर तक पत्ती उबालेंगे, तो चाय कड़वी हो जाएगी क्योंकि पत्ती अपना 'टैनिन' छोड़ देती है.
क्या आप अदरक को कूटकर ठंडे पानी में डाल देते हैं? अगर हां, तो आपको वो असली खुशबू कभी नहीं मिलेगी.कब मिलाएं- अदरक और इलायची को तब डालें जब पानी उबल रहा हो. इन्हें पत्ती के साथ कम से कम 1 मिनट तक पकने दें ताकि इनका फ्लेवर पानी में पूरी तरह समा जाए.
ज्यादा दूध वाली चाय भारी लगती है और ज्यादा पानी वाली चाय पतली.
परफेक्ट माप- एक कप चाय के लिए हमेशा 1/3 कप पानी और 2/3 कप दूध का रेश्यो रखें.
टिप- दूध हमेशा रूम टेम्परेचर पर या हल्का गर्म होना चाहिए. एकदम फ्रिज से निकला ठंडा दूध उबलती चाय के तापमान को गिरा देता है, जिससे स्वाद बिगड़ जाता है.
ज्यादातर लोग शुरुआत में ही चीनी डाल देते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीनी को दूध डालने के बाद डालना चाहिए. चीनी जल्दी घुल जाती है, इसलिए उसे ज्यादा पकाने की जरूरत नहीं होती.
चाय बन जाने के बाद हम तुरंत उसे कप में छान लेते हैं. यहीं आप गलती कर रहे हैं.
क्या करें- गैस बंद करने के बाद चाय के बर्तन को 30 सेकंड के लिए ढंक दें. इसे 'दम' देना कहते हैं. इससे चाय की खुशबू (Aroma) कप में आने से पहले उड़ती नहीं है और स्वाद निखर कर आता है.