लघु कथा, मार्मिक वर्णन
एक पत्नी ने अपने दिवंगत पति की शर्ट आठ वर्षों तक टांगकर रखी...
वह उसे कभी नहीं उतारती थी।
वह हमेशा उसकी जेब में पैसे रखती थी। जब भी उसके बच्चे पैसे मांगते, वह प्यार से कहती,
"अपने पिता की जेब से ले लो।"
वह ऐसा इसलिए करती थी ताकि उसके बच्चे कभी अपने पिता को न भूलें, ताकि उनकी मौजूदगी उनकी ज़िंदगी के हर छोटे से छोटे पल में बनी रहे।
- पिता परिवार की हिम्मत और विश्वास हैं.
- बाहर से सख्त और अंदर से नरम हैं.
- उनके दिल में कई मर्म दफ़न हैं.
- संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार हैं.
- परेशानियों से लड़ने के लिए दो धारी तलवार हैं.
- बचपन में खुश करने वाले खिलौने हैं.
- नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाले बिछौने हैं.
- पिता जिम्मेदारी का नाम हैं.
- जिम्मेदारी निभाते-निभाते थकते नहीं हैं.
- मुश्किलों को देखकर कभी नहीं रुकते.
- हालातों की भट्टी में खुद को तपाते हैं.
- पिता रोटी हैं, कपड़ा हैं, मकान हैं.
- पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान हैं.
- पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं.
- पिता हैं तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं.
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